"हर सुबह एक चाय की प्याली हमें कुछ सोचने पर मजबूर करती है… पर क्या कभी आपने सोचा है, एक चाय की दुकान किसी के सपनों की शुरुआत हो सकती है?"
नमस्कार! आप सुन रहे हैं "चाय और सपने", एक सच्ची ज़िंदगी से प्रेरित कहानी – जहाँ एक इंजीनियर लड़का, जॉब के पीछे भागते-भागते, अपनी माँ की बनाई चाय से एक नया सपना बुनता है।
ये कहानी है संघर्ष की, आत्म-सम्मान की, और उन छोटे-छोटे फैसलों की, जो ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं।
चलिए, शुरू करते हैं... "चाय और सपने"।
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यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और प्रेरणा देना है। इसमें दिखाए गए पात्र, स्थान और घटनाएँ किसी भी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना से मेल खाना मात्र संयोग हो सकता है। यदि किसी को इस कहानी की किसी बात से असुविधा हो, तो हम क्षमा चाहते हैं। इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है।