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  • गंगा रतन बिदेसी भाग-59
    Mar 31 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के उनसठवां आ आखिरी भाग ..

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  • गंगा रतन बिदेसी भाग-58
    Mar 31 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के अंठावनवां भाग ..

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    13 min
  • गंगा रतन बिदेसी भाग-57
    Mar 31 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के संतावनवां भाग ..

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    15 min
  • गंगा रतन बिदेसी भाग-56
    Mar 29 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के छपनवां भाग ..


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    15 min
  • गंगा रतन बिदेसी भाग-55
    Mar 29 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के पचपनवां भाग ..

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  • गंगा रतन बिदेसी भाग-54
    Mar 27 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के चउवनवां भाग ..

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  • गंगा रतन बिदेसी भाग-53
    Mar 27 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के तिरपनवां भाग ..

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    16 min
  • गंगा रतन बिदेसी भाग-52
    Mar 26 2025

    उन्नीसवीं सदी के मध्य के आसपास भारत में अपना दुखद हालात आ औपनिवेशिक सरकार के अत्याचार से कुचलल गंगा रतन बिदेसी के पुरखा लोग नाताल चल गइल आ भारत से ओह लोग के नाम आ निशान के सफाया हो गइल. अपना धरती के याद करे के फंतासी में फंसल गंगा रतन बिदेसी के पिता रतन दुलारी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथे शामिल होखे खातिर अहमदाबाद अइले। एहिजा एह आंदोलन के फलस्वरूप भारत के जनता के आजादी मिलल आ ओही साथे सत्याग्रही रतन दुलारी बेघर हो गइलन. स्वतंत्र भारत के टूटल-फूटल समाज में बेघर चिरई निहन उ धीरे-धीरे कमाई करत परिवार के स्थापना कईले अवुरी अधबूढ़ उमर में विधवा से बियाह क के आपन जीवन जीए लायक बना लेले। उनकर भाग्य के सूखल जड़ माटी के ठीक से पकड़ तक ना लेले रहे कि उनकर खेत गिरवी रखल गईल उनकर बेटा गंगा रतन बिदेसी, बेटा के बेमारी से बोझिल, कर्जा में डूब गईले। आपन कर्जा वसूली आ अपना परिवार के गिरवी राखल खेती के जमीन के भरपाई करे का चक्कर में ऊ बंगाल के हावड़ा, कलकत्ता के खसखस ​​बाजार आ सीलदाह रेलवे स्टेशन से दजीलिंग के चाय बाग आ आखिर में प्रेसिडेंसी जेल ले चहुँप जालें. प्रेसीडेंसी जेल में जिनगी के तरे कटेला का गंगा रतन बिदेसी जेल से बहरी आ पावेले ? आखिर उ काहें जेल जाले ? जाने खातिर सुनि ई कहानी के बावनवां भाग ..

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