जीवन की सरगम JIVAN KI SARGAM
स्वर कुछ मेरे, कुछ तुम्हारे
Impossible d'ajouter des articles
Échec de l’élimination de la liste d'envies.
Impossible de suivre le podcast
Impossible de ne plus suivre le podcast
Bénéficiez gratuitement de Standard pendant 30 jours
Acheter pour 6,99 €
-
Lu par :
-
Meenakshi Pathak
-
De :
-
Meenakshi Pathak
À propos de ce contenu audio
“जवन क सरगम; सवर कछ मर, कछ तमहर
जवन क सरगम उन अनसन आवज क गज ह, ज हर नर क मन म कह न कह बस हत ह, कभ परम, पड म, त कभ आतम-खज क यतर म |
यह सगरह एक सधरण भष म, असधरण भवनओ क उजगर करत ह i
परम, समरपण, असतष, उममद, रशत क परत और आतमक सतलन क खज—यह सब समय ह इन पकतय म i
“एहसस, तम मल और जदग” कवत म परम और समरपण क भवनय उजगर हत ह वह “हमजल” तथ “हमसफर” म कछ नरश, हतश क भव समन आत ह | “कय” “जन कय” और “मन करत ह” कवतय म नर क मन म अनक परशन उठत दखत ह |
“व आसम अपन“ एव “कनर क आस“ जस कवतय जवन म उममद भ जगत दखत ह |
“बद” कवत , कदरनथ धम जन क आपद म अपन क खन वल क दख मन क वयथ स पररत ह.
“कच क रशत” तथ “न अलग कर उनह” जस कवतओ म कह आप जवन क बदलत सबध और रशत क परशन क समझन क कशश अवशय कर सकग, त कह जवन जन क अलग रह पर चल पडग |अपन जवन क खशहल बनन चहत ह त आप इन कवतओ क जरर पढ | य कवतए आपक एक नई सच और नई दश म ल जन क परयतन ह |
इस सरगम क कवतय क सवर क मधयम स अपन आपस रशत म उन छट-छट खशनम पल क पकडन सख और आपस म खश रहन क कशश कर, कयक अकसर खशय आपक आस-पस ह हत ह |
यद आप अपन जवन क भगदड स कछ पल नकलकर खद स जडन चहत ह, त यह कवय-सगरह आपक अपन ह भतर क आवज स मलन क आमतरण दत ह शबद क इस सरगम म शयद आपक आपक ह जवन क कछ सर मल जए i
Please note: This audiobook is in Hindi.
©2024 Meenakshi Pathak (P)2025 Meenakshi Pathak