"यादें जो पीछे रह गई" – इस कहानी में बचपन की मासूमियत, गाँव की मिट्टी की खुशबू, और समय के साथ बदलते रिश्तों की झलक है। लेखक अपने बचपन के दिनों को याद करते हैं, जहाँ पूरा गाँव उनका परिवार था, हर घर में एक माँ थी, हर गली उनकी थी। लेकिन समय के साथ सब बदलता गया—गाँव से शहर की ओर सफर, रोशनी से भरी सड़कों का आकर्षण, और फिर गाँव की यादों की कसक। जब सालों बाद गाँव लौटे, तो पाया कि गाँव भी बदल चुका था—पहचान के निशान मिटते जा रहे थे। यह एक मार्मिक यात्रा है, जो हमें अतीत की उन यादों से जोड़ती है, जो कभी पीछे छूट गईं।
🔹 श्रेणी: कहानी, संस्मरण
🔹 Tags: #बचपन #गाँव #यादें #nostalgia