Épisodes

  • Baharan !
    Jan 22 2026

    सामाजिक ताना बना पs लिखाइल ई कहानी आजु के समाज मे आरक्षण से उपजल दर्द के बड़ा नीक से उकेरेले । गरीब आ पढ़े-लिखे मे बढ़िया रहला के बादो तथाकथित अगड़ा के सरकारी नोकरी खातिर कइसे दूर-दुरावल जाला एह कहानी मे रवा सभे सुन सकेनी ।

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    13 min
  • Bhool
    Jan 21 2026

    टोमास ग्लाविनिक के लिखल कहानी ओह मानव स्वभाव पs आधारित कहानी हs, जवना में कवनो आदमी अपना के सही बुझत सामने आला आदमी के गलत मान लेला। एहमे एगो अइसन रेस्तरा जवना के मय टेबुल कुरसी एके लेखा बा, ओमे एगो आदमी जाता आ आपन पसन के भोजन मंगावत बा, आ एगो छुटल आइटम लेवे काउंटर पs जाता। वापस आ के ऊ का देखत बा कि एगो आदमी ओकर खाना खात बा आ सूप पियत बा। ई देख के ऊ का करत बा आ का ओकर ई सोच सही निकलत बा? जाने खातिर सुनीं ई कहानी॥

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    5 min
  • Pita ka nach!
    Jan 20 2026

    नवहा लेखक आशुतोष जी के लेखनी से लिखाईल ई कहानी बड़ा मरम आ करेजा के बेधे वाला बा, ई कहानी सुनत-सुनत रवा आँखिन के सोझा गाँव-जवार, आस- पड़ोस आ घर-टोला में अइसन कहानी जरूरे रवा आँखिन के सोझा नाचे लागी।


    कहानी ओह समय के बा जब भोजपुरियांचल में एगो प्रसिद्ध नाच के विधा के बोलबाला रहे जेकरा के "लौंडा नाच" कहल जाला ...... के तरे एगो बाप साड़ी पहिन के मंच पs आईल आ अपना परिवार के पललस आ समाज में आपन नाव के झण्डा गाड़ देलस .....

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    12 min
  • Do Gaj Zameen!
    Jan 19 2026

    "एगो इंसान के चैन से सूते खातिर केतना जमीन चाहीं? एक एकड़? दस एकड़? कि ई पूरा शहर? आज हमनी जेवना सफर पर निकले वाला बानी जा, ओकर नायको अइसने तलाश में निकलल रहे। ओकरा लागत रहे कि जेतना जादे जमीन ओकरा लगे होई, ओतने बड़ ओकर पहचान होई। बाकिर बेचारा के का पता रहे कि कुदरत त ओकरा खातिर पहिले से ही एगो पैमाना तय कइले बिया। त तनी दिल थाम के सुनीं... 'दो गज जमीन'।"

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    15 min
  • Ghaswali !
    Jan 17 2026

    वासना एगो अइसन शब्द जवना से देवता लोग भी बांचल नइखन तs मानुस के बतिये छोड़ दिहल जाए बाकिर वासना कइसे प्रेम में बदलेला एक्र बढ़िया उदाहरण एह कहनी से मिलेला । प्रेमचन्द जी के कृति से इ एगो बेजोड़ कहानी जवन बतावे ले की प्रेम में वासना के कवनो स्थान नइखे प्रेम प्रेम होला गंगा जी के पानी नियन निर्मल । एह कहनी में एगो गरीबदलित परिवार के कहनी बा नायिका के मरद जइसे तैसे आपन गुजारा करत बा एक्का चलाई के आ ओकर ओकर मेहरारू बाजार में घास जवन जानवरन के चारा होला ओकरा के बेचत बिया, ओही गाँव के एगो मनचला आदमी जवन बडका जमीदार रहेला ओकरा पर आंखी गड़वले रहेला आखिर का होला एह एह कहनी में का उ जमीदार आपन मंसूबा में सफल हो पावेला जाने खातिर सुनी इ बेहतरीन कहनी के

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    37 min
  • Jhumke !
    Jan 12 2026

    उनकर सगा माने की आपन भउजाई सुभाष के मेहर इ समान देखली तs आपन मुंह बनवली-'जइसे हमनी के ना देत रहनी जा रउआ के ? देखवात फिरेली की ढेर नेह बा रवा से ....

    सामाजिक ताना बना पs बुनाइल ई कहानी बड़ा मर्मस्पर्शी बा .....

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    12 min
  • Danav Kenkda
    Jan 11 2026

    भोजपुरी लोककथा में जातक कथा के भी अपार भंडार बा ... ज्ञानपरक कहानियन से नयका पीढ़ी के सीख मिले एह से ई कहानियन के लोग बड़ा चाव से अपना बाल-बाचा के सुनावे ला .....

    सुनि ई ज्ञानपरक कहानी .......

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    5 min
  • Badki Didi Ka Yaksh Prashan (भाग 2)
    Jan 10 2026

    हमनी के समाज में आजो विधवा लोग के इस्थिति नीक नइखे। तमाम तरह के पाबंदी आ दरकियानूसी ख्याल से भरल ढ़ेरे बात बाड़ी सs। जब केहु विधवा होत बा उ एगो तरह से श्राप मानल जाला आ ओहू में अगर ओकरा खाली बेटिये होखे तs, समाज विधवा भइला के चलते ओकर कोढ़ में खाज अस के इस्थिति बन जाला ।

    एह कहानी में दयानंद पाण्डेय जी समाज के चेहरा पs एगो बड़का झापड़ लगवले बानी! सुनि इ कहानी के दूसरा आ आखिरी भाग ...............

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    24 min