Couverture de Workload : Work Kam, Load Zyada

Workload : Work Kam, Load Zyada

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उज्जवल कुमार सिंह का उपन्यास 'वर्क लोड (वर्क कम, लोड ज़्यादा!)' आधुनिक कार्य संस्कृति और कार्यालयी जीवन में व्याप्त विसंगतियों पर एक तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करता है। लेखक ने अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर दिखाया है कि कैसे संस्थानों में वास्तविक उत्पादकता के बजाय 'अत्यधिक व्यस्त दिखने' का ढोंग प्रधान हो चुका है। इस पुस्तक में शर्मा जी, वर्मा जी और शुक्ला जी जैसे पात्रों के माध्यम से सरकारी और निजी दफ्तरों में फैली अकर्मण्यता और दिखावे की प्रवृत्ति को उजागर किया गया है। उपन्यास का मूल संदेश यह है कि आज के दौर में काम कम हो रहा है, परंतु मानसिक तनाव और काम के बोझ का शोर बहुत अधिक है। अपनी हास्यप्रद शैली में यह कृति पाठकों को आत्म-मंथन के लिए प्रेरित करती है कि कहीं वे भी इसी 'वर्क लोड' के छलावे का हिस्सा तो नहीं हैं। यह साहित्यिक कार्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कार्यस्थलों के यथार्थ को आईना दिखाने के उद्देश्य से रचा गया है।

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