बलात्कर तो बहुत आसानी से हो जाते है,पर लोगो को यह ज्ञात नही की उसके बाद एक महिला को किस दर्द और शर्मिंदगी से रूबरू होना पड़ता हैं।
जिस समाज को हौसला और लड़ने की ताकत देनी चाहिए, आज वही समाज उन्हें देखने से मुँह फेर लेता हैं।
क्या यह सही हैं या हमारी सोच ने हमे यह करने से मजबूर कर दिया हो या फिर हम अपने पर होने का इंतजार करते हैं।
आप एक समाज के नागरिक होने के कारण अपने सुझाव दिजिए, ताकि एक कदम महिला के लिए उठाया जा सके।
उनसे मुँह फेर के नही बल्कि गले लगाकर ये कहे कि "तेरे पास ताकत थी,इसलिए तूने दरिंदों से लड़ लिया"।