Couverture de Cafe Kahaani: From My Heart To Yours

Cafe Kahaani: From My Heart To Yours

Cafe Kahaani: From My Heart To Yours

De : Cafe Kahaani™ by Seema Chawdhary
Écouter gratuitement

À propos de ce contenu audio

Cafe Kahaani brings to you my take on life experiences via talks or poems, or both. :)Cafe Kahaani™ by Seema Chawdhary Sciences sociales
Les membres Amazon Prime bénéficient automatiquement de 2 livres audio offerts chez Audible.

Vous êtes membre Amazon Prime ?

Bénéficiez automatiquement de 2 livres audio offerts.
Bonne écoute !
    Épisodes
    • Dil ki Aawaz
      Jan 19 2026

      ख़ुद से हार कर,

      दुनिया जीतने चले थे,

      झुलसा कर ख़ुद को,

      सब को रौशन करने चले थे,

      ख़ुद को क़ज़ा सी सज़ा देना,

      कबसे इनायत-ए-ज़रिया ज़रूरी हुआ,

      ये समझ आया होता,

      तो ख़ुद को पहले आबाद किया होता,

      आख़िर ख़ुद से नाराज़गी ही

      ख़ुद की क़ज़ा हो गई।

      ख़ुद से हार कर,

      दुनिया जीतने चले थे...


      जीतना ख़ुद को था,

      लड़ाई भी ख़ुद ही से थी,

      समझना भेद जीने और होने का,

      दुनिया ख़ुद की फ़तह करनी थी।

      जो थम गए एक पल,

      धड़कन ने आवाज़ दी,

      चले आओ वापस,

      बात अब शुरू होगी,

      सुन लो मुझे तुम,

      मुस्कान ना थमेगी,

      दुनिया तुमसे पूछेगी,

      तुम्हारे पास क्या

      है कोई जादू की छड़ी?

      ख़ुद से ना हारो,

      अपने दिल को जीतो,

      तुम्हारे होने से,

      रौशन ख़ुद-ब-ख़ुद दुनिया होगी।

      ख़ुद से हार कर,

      दुनिया जीतने की,

      कोई भी ज़रूरत नहीं,

      ख़ुद के संग चलना

      ज़्यादा है ज़रूरी।

      ©Seema Chawdhary🦋

      19 January 2026

      Afficher plus Afficher moins
      1 min
    • Space: From My Heart To Yours
      Nov 25 2025

      Some questions consistently pop up in my head, hence tried to put it out here...

      Afficher plus Afficher moins
      5 min
    • Dilli Ki Baarish
      Oct 8 2025
      दिल्ली की सांझ सुर्ख़ाब सी हो चली है, और बारिश के बाद ये शहर धुंधला सा लगता है। ताजदार-ए-हरम की निगाह-ए-करम हवाओं में गूंज रही है, मानो हर बूंद में कोई राग छिपा हो। मैं सड़कों पर चल रही हूँ, कदमों की आहट के साथ मन में सवाल उमड़ते हैं-ये लोग कहाँ भाग रहे हैं?हर चेहरा अपनी कहानी लिए चुपके से आगे बढ़ रहा है, और मैं, अपने खयालों की दुनिया में खोई, सोच रही हूँ कि क्या है जो इस पल को इतना खास बनाता है। मेरे मन में अरमानों का मेला सजा है, जैसे बादलों पर पाँव रखे हों। दिल कहता है, कुछ बड़ा होने वाला है, कुछ नया जन्म लेने को बेताब है। क्या ये दिल्ली की गलियों का जादू है, जो हर बार मुझे अपने में समेट लेता है? या फिर मेरे भीतर की वो बेचैनी, जो हर बार इस शहर के साथ सांस लेती है? मैं चलती हूँ, और हर कदम के साथ लगता है, शायद यहीं कहीं मेरी मंजिल का आलम छिपा है। ये शहर, ये बारिश, ये हवा, सब मिलकर जैसे कोई गीत गुनगुना रहे हैं, और मैं उसकी ताल पर थिरक रही हूँ, बिना जाने कि अगला सुर क्या होगा।बारिश में दिल्ली को देखकर मैं पागल सी हो जाती हूँ। ये शहर, जैसे कोई पुराना गीत हो, जो हर बूंद के साथ फिर से जी उठता है। सड़कों पर पानी की धाराएँ, गलियों में ठहरी सी नमी, और हवाओं में बसी वो सुगंध, सब मिलकर मुझे बेकरार कर देते हैं। मगर ये पागलपन है अरमानों का, जैसे मैं कुछ बड़ा बना रही हूँ, जैसे समय को नाविक की तरह खेते जा रही हूँ। रास्ते में लोग मिलते जा रहे हैं, और धीरे-धीरे एक कारवां बनता जा रहा है। हर मुलाकात एक नया रंग जोड़ती है, हर हंसी मेरे दिल में एक नई कहानी बुनती है।फिर एक पल को ठहरती हूँ और सोचती हूँ, सब साथ तो हैं ना?वो जो कभी मेरे साथ थे, वो जो अब कहीं पीछे छूट गए, उनकी यादें अचानक कौंध जाती हैं। उनकी हंसी, वो बेपरवाह बातें, वो पल जो अब सिर्फ़ यादों में बाकी हैं। मगर अजीब बात है, उनकी हंसी आज के लोगों की हंसी में घुल जाती है। जैसे समय ने सारी हंसी को एक धागे में पिरो दिया हो, बीता हुआ, और जो अब है, सब एक साथ।मैं मुस्कुराती हूँ। मेरा दिल ख़ुश है, संतुष्ट है। बारिश की बूंदों के बीच, गुलाब की पंखुड़ियाँ जैसे मुझे ख़ुशी और दिलासा देती हैं। वो नाज़ुक सी पंखुड़ियाँ, जो हवा में लहराती हैं, मुझे यकीन दिलाती हैं कि सब ठीक है। दिल्ली की ये बारिश, ये लोग, ये कारवां, और मेरे मन का ये ...
      Afficher plus Afficher moins
      4 min
    Aucun commentaire pour le moment