Couverture de Dumchhalla "दुमछल्ला" [Tail]

Dumchhalla "दुमछल्ला" [Tail]

जिंदगी भी बस ऐसी ही है [Life Is Just like That]

Aperçu
Essayez pour 0,99 €/mois Essayer pour 0,00 €
Offre valable jusqu'au 12 décembre 2025 à 23 h 59.
Jusqu'à 90% de réduction sur vos 3 premiers mois.
Écoutez en illimité des milliers de livres audio, podcasts et Audible Originals.
Sans engagement. Vous pouvez annuler votre abonnement chaque mois.
Accédez à des ventes et des offres exclusives.
Écoutez en illimité un large choix de livres audio, créations & podcasts Audible Original et histoires pour enfants.
Recevez 1 crédit audio par mois à échanger contre le titre de votre choix - ce titre vous appartient.
Gratuit avec l'offre d'essai, ensuite 9,95 €/mois. Possibilité de résilier l'abonnement chaque mois.

Dumchhalla "दुमछल्ला" [Tail]

De : Nishant Jain
Lu par : Aroma
Essayez pour 0,99 €/mois Essayer pour 0,00 €

3 mois pour 0,99 €/mois, puis 9,95 €/mois. Possibilité de résilier chaque mois. Offre valable jusqu'au 12 décembre 2025 à 23 h 59.

9,95 € par mois après 30 jours. Résiliez à tout moment.

Acheter pour 4,40 €

Acheter pour 4,40 €

3 mois pour 0,99 €/mois Offre valable jusqu'au 12 décembre 2025. 3 mois pour 0,99 €/mois, puis 9,95 €/mois. Offre soumise à conditions.J'en profite

À propos de ce contenu audio

About the book:

जब इंसान अंदर से टूटता है तो वो अपनी बात समझाने के तरीके ढूँढने लगता है । और जब अंदर भावनाओं का ज्वार उठ रहा हो और सुनने वाला कोई न हो, तो वो खुद के लिए फैसलें लेता है । बेशक वो समाज की मान्यताओं में सही न हो लेकिन वो फिर भी अपने हक़ में फैसलें लेता है । यह कहानी है जागी आँखों से देखें जाने वाले सपनों की, उन अहसासों की, जिन्हें हम जीना चाहते हैं लेकिन जी नहीं पाते । उन अहसासों की जो जन्म तो लेते हैं लेकिन कुछ समय बाद सिकुड़ जातें हैं । यह कहानी है भावनाओं से भरे 6 लोगों की, जिनमें प्यार, विश्वास, अपनापन तो है लेकिन एक-दूसरे को आज़ादी देने की हिम्मत नहीं है । किसी की एक गलती उन सभी की जिंदगी को उस मोड़ तक ले जाती है, जहाँ से कुछ भी ठीक कर पाना न नहीं था । दखल किसने, किसकी जिंदगी में दिया था, कह पाना मुश्किल है । नादानी, नासमझी या अपरिपक्वता, चाहे जो भी नाम दें लेकिन सवाल तो बस आज़ादी से ही जुड़ा था ।

about the author आधे चार्टर्ड अकाउंटेंट और कभी पूरे स्टॉक ब्रोकर रहे निशान्त, आप सब की ही तरह, परिवार और रिश्तों तो अहमियत देते हैं लेकिन व्यक्तिगत आज़ादी भी इनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है । इनसे बात करना आपको सुकून देता है लेकिन इनके विचार आपको भीतर तक परेशान कर सकते हैं, झकझोर सकते हैं । इन्हें शुरु से ही पढ़ने का काफी शौक है और कुछ-कुछ लिखते भी रहते हैं । इनकी लिखी कहानी “बायोलॉजिकल मदर” उनकी चर्चित कहानिओं में शुमार है । 2017 में एक बीमारी के बाद इन्होनें अपने पारिवारिक प्रकाशन में दिलचस्पी लेनी शुरु की और कम समय में ही उसे एक मुकाम पर स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर हैं । जब भी इन्हें फुर्सत मिलती है तो शोर-शराबे से दूर, प्रकृति की एकांत गोद में खुद को महफूज़ रख लेते हैं ।

Please note: This audiobook is in Hindi.

©2021 Sanmati Publishers (P)2021 Sanmati Publishers
Fiction Psychologie
Les membres Amazon Prime bénéficient automatiquement de 2 livres audio offerts chez Audible.

Vous êtes membre Amazon Prime ?

Bénéficiez automatiquement de 2 livres audio offerts.
Bonne écoute !
    Aucun commentaire pour le moment